कार्यपालिका भाग 5 – राष्ट्रपति – अनुच्छेद 52- 62

कार्यपालिका सरकार का कार्यकारी अंग है, जो राज्य के शासन का अधिकार रखती है । कार्यपालिका ही विभिन्न नीतियों का निर्धारण तथा उसका क्रियान्वन करती है। कार्यपालिका – Executive हमारे संविधान का के भाग -5 में है।
कार्यपालिका में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री परिषद् महान्यायवादी शामिल है। संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 52 से अनुच्छेद 151 तक है ।

अनुच्छेद 52 – Article 52  – भारत का एक राष्ट्रपति होगा ।

अनुच्छेद 53 – Article 53 -कार्यपालिका

संघ की समस्त “कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी”, जिसका प्रयोग वे स्वयं या अपने अधिनस्थों के माध्यम से करेंगे। राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक है, वह देश का प्रमुख है, तथा देश की एकता व अखंडता का प्रतीक है

अनुच्छेद 54 – Article 54 – राष्ट्रपति का चुनाव (पद्धति)


भारत एक गणतंत्र होने के कारण भारत का प्रमुख निर्वाचित होता है । इनका चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन के द्वारा होता है । निर्वाचक मंडल –  संसद के दोनों सदनों के तथा राज्यों की विधानसभाओं के एवं दिल्ली एवं पोंडिचेरी की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य 

मत मूल्य 

                        राज्य की कुल जनसंख्याँ             1
1.एक विधायक= ————————   x ——-
का मत मूल्य       कुल निर्वाचित विधायक            1000      

    

                            कुल विधान सभाओं का
                                    मत मूल्य 
2. एक सांसद का  = ——————————
     मत मूल्य           संसद के दोनों सदनों के
                            निर्वाचित सदस्यों की संख्यां

इसी पद्धति के कारण सभी राज्यों के मध्य एवं राज्यों के विधानसभाओं एवं सांसद के मध्य मत मूल्य की समानता स्थापित होती है, अतः राष्ट्रपति के चुनाव में जनसंख्याँ को आधार माना गया है

अनुच्छेद 55 – Article 55 – राष्ट्रपति का कोटा ( निर्वाचन पद्धति)

अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत “एकल संक्रमणीय मत” व्यवस्था द्वारा किया गया है । राष्ट्रपति के चुनाव में अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली अपनाई गई है, इसके अंतर्गत विजेता का मतों का एक निश्चित कोटा प्राप्त करना होता है इस कोटे का निर्धारण निम्नलिखित सूत्र से होता है —

                             कुल वैध मतों की संख्यां 
राष्ट्रपति के लिए = —————————  +   1
निश्चित कोटा        चुने जाने वाले पदों की संख्यां +1

इस चुनाव मतदाता को मत पत्र प्राप्त होता है, जिसमें उसे चुनाव में शामिल उम्मीदवारों को वरीयता देनी होती है, सर्वप्रथम “प्रथम वरीयता” की गणना होती है अगर इस गणना में कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटा प्राप्त कर लेता है तो वह विजयी हो जाता है । 

अन्यथा न्यूनतम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार के मत पत्रनिरस्त हो जाते है तथा उसे प्रथम वरीयता देने वाले मतदाताओं की द्वितीय वरीयता को प्रथम वरीयता को बदला जाता है और अगर इसमें निर्धारित कोटा प्राप्त हुआ तो निर्णय हो जाता है । 

अन्यथा पुनः बचे हुए उम्मीदवारों में से न्यूनतम मत प्राप्त करने वाले का मत पात्र निरस्त हो जाता है तथा उसकी द्वितीय वरीयता को प्रथम वरीयता बना दिया जाता है और यह क्रम जारी रहता है 

भारत के इतिहास में केवल एक बार ही इस प्रक्रिया का प्रयोग हुआ है, जिसे द्वितीय चरण की गणना कहते है, जो 1969 ई. में व्ही.व्ही. गिरी vs निलय संजीव रेड्डी के चुनाव के समय की गई थी

राष्ट्रपति के चुनाव में होने वाले किसी भी विवाद के लिए केवल उच्चतम न्यायालय फैसला कर सकता है तथा चुनाव को इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता की किसी राज्य की विधान सभाओं ने भाग नहीं लिया है

अगर राष्ट्रपति का चुनाव अवैध घोषित कर भी दिया जाता है तो भी उसके द्वारा किये गए कार्य अमान्य घोषित नहीं होंगे 

कार्यपालिका भाग 5 – राष्ट्रपति – अनुच्छेद 52- 62

कार्यपालिका भाग 5 - राष्ट्रपति - अनुच्छेद 52- 62

अनुच्छेद 56 – Article 56 – राष्ट्रपति का कार्यकाल

राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण (शपथ) की तिथि से 5 वर्ष होता है। इस कार्यकाल के भीतर ही नए राष्ट्रपति का चुनाव करना आवश्यक है । कोई व्यक्ति चाहे कितने बार भी भारत का राष्ट्रपति बन सकता है 

अनुच्छेद 57 – Article 57 – पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता

कोई व्यक्ति, जो राष्ट्रपति के रूप में पद धारण करता है या कर चुका है, इस संविधान के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए उस पद के लिए पुनर्निर्वाचन का पात्र होगा।

अनुच्छेद 58 – Article 58 – राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता या पात्रता

  1. भारत का नागरिक हो
  2. 35 वर्ष की आयु पूर्ण हो 
  3. लोकसभा के सदस्य बनने की योग्यता हो 
  4. लाभ के पद पर ना हो 
  5. 50 अनुमोदक एवं 50 प्रस्तावक निर्वाचक होने चाहिए
  6. दिवालिया न हो 
  7. पागल न हो 

अनुच्छेद 59 – Article 59 – राष्ट्रपति पद के लिए शर्तें 

राष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा 
राष्ट्रपति अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए प्रत्येक उम्मीदवार के पास 50 अनुमोदक एवं 50 प्रस्तावक निर्वाचक होने चाहिए तथा उसे 15000 रूपये जमानत राशि RBI के खाते में जमा करनी होती है, कोई भी उम्मीदवार मतदान का 1/6 मत नहीं प्राप्त करता है तो यह जमानत राशि जब्त कर ली जाती है

अनुच्छेद 60 – Article 60 – राष्ट्रपति द्वारा शपथ

प्रत्येक राष्ट्रपति और प्रत्येक व्यक्ति, जो राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, अपना पद ग्रहण करने से पहले भारत के मुख्‍य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष  शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा। 

अनुच्छेद 61 – Article 61 – महाभियोग


राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया इस अनुच्छेद में वर्णित है जिसे महाभियोग कहा जाता है । यह प्रक्रिया अमेरिका के संविधान से प्रेरित है ।
महाभियोग का आधार – संविधान का उल्लंघन या अतिक्रमण प्रस्ताव लाया जाना – संसद के किसी भी सदन में एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर के द्वारा ।
पहले सदन में कार्यवाही शुरू करने के पहले राष्ट्रपति को 14 दिन के पूर्व सुचना दी जायेगी। राष्ट्रपति अपना पक्ष स्वयं या प्रतिनिधि के माध्यम से रख सकते है, अगर पहले सदन में प्रस्ताव विशेष बहुमत ( उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो तिहाई से अधिक जो की सदन के कुल सदस्यों का आधे से अधिक ) विशेष बहुमत से पारित हो जाता है तो यह द्वितीय सदन में जाता है ।
द्वितीय सदन में राष्ट्रपति  को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है अगर सदन उनकी बात से संतुष्ट न हो और द्वितीय सदन में भी विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित हो जाए तो प्रस्ताव पारित होने की तिथि से राष्ट्रपति को पद से मुक्त (पदच्युत) समझा जाता है ।
 

अनुच्छेद 62 – Article 62 – राष्ट्रपति का पद रिक्ति 

  1. कार्यकाल की समाप्ति 
  2. मृत्यु हो जाने पर
  3. त्यागपत्र देने पर
  4. महाभियोग के द्वारा पदच्युति
  5. योग्यता साबित होने पर
  6. असमर्थता
कार्यकाल की समाप्ति के आलावा अन्य स्थितियों में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं तथा इस दौरान उन्हें राष्ट्रपति को प्राप्त शक्तियां, विशेषाधिकार, वेतन तथा सुविधाएँ मिलती है परन्तु अधिकतम 6 माह के अंतर्गत नया चुनाव कराना आवश्यक है

कार्यकाल की समाप्ति पर अगर चुनाव नहीं हो पाया तो वर्तमान राष्ट्रपति अपने पद पर तब तक बने रहेंगे जब तक की नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता । 
राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को दे सकते है, उप राष्ट्रपति जिसकी सुचना तत्काल लोकसभा अध्यक्ष को देगा

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