काकीनाड़ा अधिवेशन एवं झंडा सत्याग्रह छत्तीसगढ़

काकीनाड़ा अधिवेशन 1923

दिसम्बर 1923 में काकीनाड़ा अधिवेशन बंगाल प्रान्त ( वर्तमान में आन्ध्र प्रदेश ) में हुआ था ।  इस अधिवेशन में राष्ट्रीय स्तर के नेता मोहम्मद अली तथा मौलाना शौकत अली ने शामिल होने के लिए पैदल रैली निकाली ।

इसमें छत्तीसगढ़ के धमतरी क्षेत्र से तथा बस्तर के आस पास के स्थानीय जन जातियों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने हेतु नारायण राव मेघावाले ने बस्तर अंचल से काकीनाड़ा तक 25 कांग्रेसी कार्य कर्ताओं के साथ पैदल रैली प्रारम्भ किया।

इसमें कार्यकर्ताओं का एक दल सागर क्षेत्र से हल्बे का दल, राजिम से पं. सुंदर लाल शर्मा एवं श्याम लाल गुप्त, सिहावा नगरी से श्याम लाल सोन तथा धमतरी से गिरधारी लाल तिवारी तथा राम जीवन लाल सोनी आदि दल सम्मिलित हुए।

काकीनाड़ा अधिवेशन एवं झंडा सत्याग्रह छत्तीसगढ़

झंडा सत्याग्रह 1923

राष्ट्रीय झंडा सत्याग्रह आन्दोलन 11 मार्च 1923 को मध्य प्रान्त के नबलपुर से प्रारम्भ किया गया । जब झंडा सत्याग्रह का केंद्र जबलपुर से नागपुर स्थानांतरित किया गया तब छत्तीसगढ़ में भी इसका प्रभाव पड़ा
बिलासपुर क्षेत्र के टाउनहाल में 31 मार्च 1923 को इसके सम्मान में एक सम्मलेन का आयोजन किया गया, इस सम्मलेन के नेतृत्वकर्ता कांटी कुमार भारती थे
इसके साथ ही धमतरी क्षेत्र में पं. सुन्दरलाल शर्मा द्वारा झंडा सत्याग्रह के सहयोग में सम्मेलन आयोजन किया गया

रायपुर की क्रांतिकारी घटना 1924

दुर्ग के क्रांतिकारी नेता शेख मुन्तजि मुद्दीन ने रायपुर के कचहरी में स्थित जॉर्ज पंचम की प्रतिमा को कोलतार से पोंत कर जूतों की माला पहनाकर ब्रिटिशों के प्रति विरोध प्रदर्शन किया