संसदीय अवधारणायें

संसदीय अवधारणायें

अनुच्छेद  79  से  123  संघ की विधायिका – विधायन – विधि

संसदीय अवधारणायें

सत्रावसान

सदन का सत्र जब राष्ट्रपति के द्वारा समाप्त घोषित किया जाता है तब वह सत्रावसान कहलाता है, इसके बाद संसद कि बैठक दुबारा तभी हो सकती है जब राष्ट्रपति द्वारा दुबारा सत्र का आह्वान किया जावे ।

स्थगन

यह कार्यवाही सदन के पीठासीन अधिकारी के द्वारा की जाती है, सत्र के दौरान ही एक निश्चित समय ( कुछ घंटे या कुछ दिन ) के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी जाती है इसका कारण गणपूर्ति न होना अथवा कार्यवाही संचालन में बाधा आदि हो सकते है ।

अनिश्चितकालीन स्थगन

अगर संसद कि बैठक स्थगित करते समय पीठासीन के द्वारा दुबारा मिलने का समय निश्चित नहीं किया गया हो तो ऐसी स्थिति अनिश्चितकालीन स्थगन कहलाती है । सामान्यतः सत्रावसान से पहले यह कार्यवाही की जाती है ।
नोट :सत्रावसान एवं स्थगन दोनों के कारण विधयेकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता परन्तु सत्रावसान के बाद नोटिस समाप्त हो जायेंगे ।
एक वर्ष में न्यूनतम 2 सत्र आवश्यक है जिनके मध्य का अंतर 6 माह से अधिक नहीं होना चाहिए ।

संघ की विधायिका – विधायन – विधि

विघटन

यह कार्यवाही केवल लोकसभा पर हो सकती है, लोकसभा में सरकार के बहुमत में न रहने पर राष्ट्रपति लोकसभा विघटित कर सकते है, एक बार किया गया विघटन निरस्त नहीं किया जा सकता तथा आम चुनाव द्वारा अगली लोकसभा का गठन होता है ।
राष्ट्रपति लोकसभा का विघटन प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है परन्तु कुछ परिस्थिति में उसे स्वविवेकीय शक्ति उपयोग करने का अधिकार है ।
विघटन के बाद विधेयकों पर प्रभाव :
समाप्त होने वाले
लोकसभा में लंबित – जो लोकसभा में शुरू हुआ या राज्यसभा से आया
राज्यसभा में लंबित जो लोकसभा से आया हो
समाप्त नहीं होने वाले
राज्यसभा में लंबित – जो राज्यसभा में शुरू हुआ
राष्ट्रपति के पास पहुंचा – जो लंबित है, पुनर्विचार के लिए भेजा गया , संयुक्त अधिवेशन के लिए भेज गया