पूंजीवादी , समाजवादी एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था

Punjivaadi, Samajvaadi and Mishrit Arthvyavstha – इसके पहले हमने पढ़ा की अर्थव्यवस्था के प्रकार किस आधार पर बांटे गए है ।
उनमें से एक ” विचारधारा के आधार पर ” अर्थव्यवस्था के बारे में पढेंगे, जिसके अंतर्गत पूंजीवादी अर्थव्यवस्था, समाजवादी अर्थव्यवस्था एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था है ।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था – Capitalist Economy

इस अर्थव्यवस्था को “एडम स्मिथ” ने दिया और इस विचार धरा को आगे बढाया “से SAY” के बाजार ने । ये नियम कहता था यदि कोई सामन बना है तो बिकेगा ही अर्थात हर उत्पादन अपने लिए मांग का सृजन स्वयं कर लेता है । अतः अर्थव्यवस्था में उत्पादन बढाने में ध्यान दिया जाना चाहिए ।
  • इस अर्थव्यवस्था में उत्पादन केंद्र में होता है ।
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में “बाजार मूल्य प्रणाली” होती है । मूल्य = मांग+पूर्ति  पर निर्भर ।
  • इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता ।
  • इसमें स्वरूप प्रतिस्पर्धा पर बल होता है ।
  • बाजार अर्थव्यवस्था का केंद्र होता है ।
इन सभी कारणों की वजह से इसे “बाजार आधारित अर्थव्यवस्था” भी कहते है । जैसे – अमेरिका, पश्चिम यूरोप, जापान तथा आस्ट्रेलिया ।

पूंजीवादी , समाजवादी एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था

 

समाजवादी अर्थव्यवस्था – Socialist Economy

इसका जन्म पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की असफलता से हुआ । ये विसफलता – 1850 के बाद युरोपन अमेरिका में औद्योगिक क्रान्ति आई, उन्होंने “SAY” के नियम पर कार्य करते हुए खूब उत्पादन किया लेकिन बिक्री या मांग पर ध्यान नहीं दिया ।
1929 तक आते आते वस्तु ज्यादा हो गई और खरीदने वाले नहीं थे अर्थात महा मंदी आ गई थी । इसको बाहर लाने हेतु सामाज वादी अर्थव्यवस्था का जन्म हुआ ।
ये अर्थव्यवस्था “कीन्स” के रोजगार सिधांत पर चलती है ।
कीन्स कहते है – अर्थव्यवस्था की समस्या उत्पादन नहीं वितरण है । वितरण के लिए जरुरी है क्रय शक्ति तथा करी शक्ति के लिए आवश्यक है रोजगार, इसलिए सरकार को रोजगार पर ध्यान देना चाहिए ।
सरकार रोजगार देने के लिए अर्थव्यवस्था में हस्तक्षेप करेगी, वो सार्वजनिक निवेशो के द्वारा सार्वजनिक संपत्ति का सृजन करेगी (मनरेगा), जिसमें अकुशल श्रमिकों को रोजगार प्राप्त होगा ।
कीन्स ने इस सिधांत को 1930 में दिया जिसे सबसे पहले “सोवियत रूस” ने अपनाया और इसे समाजवाद अर्थव्यवस्था कहा गया । यहाँ अर्थव्यवस्था में सरकार का हस्तक्षेप होता है ।
समाजवादी अर्थव्यवस्था के केंद्र में सरकार होती है और वाही आर्थिक निर्णय लेती है , इस कारण यहाँ प्रशासित मूल्य प्रणाली चलेगी और यहाँ निजी संपत्ति की अवधारणा नहीं चलेगी ।
उदाहरण : – सोवियत संघ , चीन और क्यूबा इस अर्थव्यवस्था को राज्य आधारित अर्थव्यवस्था कहते है । 1990 के बाद समाजवादी अर्थव्यवस्था का पतन हो गया ।

मिश्रित अर्थव्यवस्था – Mixed Economy

मिश्रित अर्थव्यवस्था ‘पूंजीवाद” एवं “समाजवादी” अर्थव्यवस्था की विशेषताओं को लाता है । इसके साथ ही यह अर्थव्यवस्था राज्य एवं बाजार को एक साथ लाता है ।
अर्थात यह कहा जा सकता है की यह अर्थव्यवस्था  “बाजार मूल्य प्रणाली” व “प्रशासित मूल्य प्रणाली” दोनों का सम्मिलित रूप है ।
मिश्रित अर्थव्यवस्था “उत्पादन” व “वितरण” दोनों को तथा सरकार संपत्ति और निजी संपत्ति दोनों को  महत्व देता है । इसका उदाहरण “भारत” है, यहाँ ना सब कुछ सरकार का है और ना ही बाजार का है ।

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