Chhattisgarh Andolan – सविनय अवज्ञा आन्दोलन द्वितिय चरण – छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Andolan – गांधीजी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन 1931 में भाग लेने लंदन गए, इस गोलमेज सम्मेलन में छत्तीसगढ़ से एकमात्र रामनुज प्रताप सिंहदेव ने भाग लिया । इस सम्मेलन में गांधी जी एवं इरविन के मध्य वार्ता हुई, जिसका कोई परिणाम नहीं निकला अतः गांधी जी पुनः भारत लौटकर सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निर्णय लिया ।
3 जनवरी 1932 को पुरे भारत में सविनय अवज्ञा आन्दोलन का द्वितीय चरण प्रारम्भ किया गया । इस आन्दोलन का प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी पड़ा जिसमें 10 जनवरी 1932 को ठाकुर प्यारे लाल सिंह ने “कर मत पटाओ” आन्दोलन के द्वारा सूत्रपात किया, परन्तु इस आन्दोलन के जुर्म में प्यारे लाल सिंह की गिरफ्तारी हो गई ।
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के छत्तीसगढ़ में संचालन हेतु पं. रविशंकर शुक्ल को 14 जनवरी 1932 में प्रथम डिटेक्टर नियुक्त किया गया । इस तरह छत्तीसगढ़ में आन्दोलन के दौरान कुल 8 डिटेक्टरों की नियुक्ति की गई ।
1. पं रविशंकर शुक्ल – इनके द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन के संचालन के लिए संघर्ष समिति का गठन किया गया तथा 23 जनवरी 1932 में पेशावर दिवस का आयोजन किया गया ।
2. पं सुन्दरलाल शर्मा
3. शंकरराव गनौद वाले
4. श्रीमती राधाबाई – छत्तीसगढ़ की प्रथम एवं एकमात्र महिला डिटेक्टर महिला थी । इन्होने शराब दूकान के सामने धरना प्रदर्शन किया एवं महिला उत्थान कार्यक्रम चलाया । इनमें इनके सहयोगी मनटोरा बाई, फुटेनिया बाई, भाकुती बाई एवं बेतानाथ तिवारी साथ थे ।
राधाबाई को इस आन्दोलन के कारण गिरफ्तार किया गया, यह छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी थी, इन्हें लंदन से डॉ. की उपाधि प्रदान की गई थी ।
5. माधव प्रसाद परगनहिया
6. रामनारायण मिश्र (हर्षुल) – इनके द्वारा “पत्र बम लिफाफा” (फोस्फेरस युक्त विस्फोटक) योजना चलाया गया, जिसे राष्ट्र विरोधी व्यक्तियों को भेजा जाता था, यह ब्रिटिश सरकार के उपर सांकेतिक प्रहार था । इस आन्दोलन के बाद रामनारायण को भी गिरफ्तार कर लिया गया ।
7. ब्रह्मदेव दुबे – इनके द्वारा बंदी दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें 4 अगस्त 1932 को रायपुर के गांधी चौक पर स्वयं को बंदी बनाकर शुभारम्भ किया गया ।
8. पं. लक्ष्मीनारायण – ये अंतिम डिटेक्टर नियुक्त हुए ।

Chhattisgarh Andolan – सविनय अवज्ञा आन्दोलन द्वितिय चरण – छत्तीसगढ़

वानर सेना का गठन (रायपुर) 1932

Chhattisgarh Andolan – रायपुर में वानर सेना के गठनकर्ता बलिराम दुबे (आजाद) थे, तथा इसका संचालन रायपुर के ब्राह्मण पारा को बनाया गया, इसमें आन्दोलन से सम्बन्धित नेताओं के सूचनाओं, पोस्टरों एवं पर्चों को एक स्थान से दुसरे स्थान पहुँचाना तथा छोटी छोटी सभाएं आयोजित करना जैसे कार्यों को सम्मिलित किया गया था

दुर्ग में सविनय अवज्ञा आन्दोलन  1932

  1. 12 फरवरी 1932 को अशांति एवं उत्तेजना फ़ैलाने के आरोप में नरसिंह प्रसाद अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया
  2. 31 दिसम्बर 1932 को घनश्याम सिंह गुप्त को झंडा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया

बिलासपुर में सविनय अवज्ञा आन्दोलन  1932

Chhattisgarh Andolan – बिलासपुर के सदर बाजार में धरना प्रदर्शन करने के आरोप में ठाकुर छेदीलाल, अवधारणा सोनी, बम्हैय्या सोनी एवं अन्य सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया