छत्तीसगढ़ में शरभपुरीय (अमरार्य) वंश

छत्तीसगढ़ में शरभपुरीय (अमरार्य) वंश  : इसके पहले भाग में हमने उत्कल (ओड़िसा) के  पर्वत द्वारक और सोम वंश  के बारे में पढ़ा । जिसमें पर्वत द्वारक वंश एवं सोम वंश ( उत्कल-ओडिशा )  की जानकारी प्राप्त की, इसी को आगे बढ़ाते हुए हम आज यहाँ छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रीय राजवंश के बारे में पढेंगे ।

छत्तीसगढ़ में शरभपुरीय (अमरार्य) वंश

शरभपुरीय वंश – अमरार्या ( Sharabhpuriya Vansh – Amrarya ) – 5 वी – 7 वी शताब्दी

  • क्षेत्र – संबलपुर , रायपुर एवं रायगढ़
  • संस्थापक – महाराज शरभराज
  • इतिहास – महाराज शरभराज  जो की इस वंश के संस्थापक थे ये राजा प्रवरसेन के यहाँ सामंत थे इस वंश को अमरार्यकुल के नाम से भी जाना जाता है, तथा शरभपुर को आर्य सभ्यता का द्वीप कहते है। 
  • स्रोत – इस वंश की जानकारी भानुगुप्त के ऐरण अभिलेख (510ई.) तथा सुखदेव राज के सिरपुर ( कौवाताल अभिलेख ) से प्राप्त होती है

प्रमुख शासक

1.  शरभराज : इस वंश के संस्थापक राजा शरभराज थे  इन्होने  “वाकाटकों” के आपसी संघर्ष का लाभ उठाकर स्वयं को स्वतंत्र घोषित किया तथा प्राकृत भाषा के स्थान पर संस्कृत भाषा को राज्य शासन का भाषा बनाया 
 
2. राजा नरेन्द्र  : राजा नरेन्द्र ने वैष्णव धर्म को अपनाया तथा परम भागवत की उपाधि धारण की । इसके संदर्भ में जानकारी पिपरदुला ताम्र पत्र अभिलेख ( सारंगढ़ ) से प्राप्त होती है 
 
इसके अतिरिक्त करुन्द अभिलेख (धमतरी) जिसमें इनके सैन्य अभियानों का वर्णन है, जो इनके शासन काल के 24 वें वर्ष में जारी किया गया। राजा नरेन्द्र के मुद्रा में पांच कलश से लक्ष्मी स्नान का चित्रण है 
 
3. प्रसन्नमात्र  – प्रसन्नमात्र ने प्रसन्नपुर नामक शहर ( मल्हार – बिलासपुर ) की स्थापना की, यह लीलागर नदी के तट पर स्थित है । इन्होने मल्हार में सिक्के बनाने का टकसाल बनवाया तथा बड़े पैमाने में स्वर्ण सिक्के का प्रचलन करवाया 
 
प्रसन्नमात्र इस वंश के सबसे शक्तिशाली शासक माने जाते है। इनका साम्राज्य कटक (उड़ीसा ) से लेकर चांदा (महाराष्ट्र) तक विस्तृत था । इनके सिक्को में गरुढ़ एवं शंख चित्र अंकित है इनके कुल 116 सिक्कें प्राप्त हुए है । प्रसन्नमात्र के दो पुत्र जयराज एवं दूर्गराज थे 
 
4. जयराज – इन्होने भी वैष्णव धर्म को अपनाया तथा परम भागवत की उपाधि धारण की । इसकी जानकारी मल्हार ताम्रपत्र अभिलेख से होती है । इसके साथ ही इस अभिलेख से ज्ञात होता है की इन्होने मुंगेली को तहसील बनवाया तथा ब्राह्मणों को भूमि दान देने की प्रथा प्रारंभ की 
 
मुंगेली के ही विष्णु स्वामी नामक ब्राह्मण को भूमि दान में दिया । आरंग ताम्रपत्र अभिलेख से इनके प्रत्यक्ष शासन व्यवस्था शरभपुर  तथा पूर्वी राष्ट्र संबलपुर को माना गया है 
 
5. दुर्गराज ( मनमात्र ) – इन्होने ( लोचन प्रसाद पांडे के अनुसार ) दूर्ग शहर की स्थपना की किन्तु अन्य साहित्यकार सहमत नहीं है 
 
6. सुखदेवराज (सुदेवराज) –  यह दुर्गराज का पुत्र था , इसने आरंग तक शासन किया एवं सिरपुर की स्थापना की । इनकी जानकारी 8 ताम्रपत्रों से प्राप्त होती है, जिसमें 6 ताम्रपत्र अभिलेख शरभपुर से प्राप्त हुए है । जिसमें शरभपुर लिखा हुआ है और 2 ताम्रपत्र सिरपुर से प्राप्त हुए जिसमें सिरपुर लिखा हुआ है । 
 
सुदेवराज की बहन “लोकप्रकाशा” का विवाह पांडू वंश के शासक इंद्रबल के साथ हुआ । सुदेवराज ने इन्द्रबल को सर्वाधिकार कर्ता की उपाधि दी, इसके सम्बन्ध में जानकारी कौवाताल अभिलेख सिरपुर से प्राप्त होती है 
 
7. प्रर्वरराज I –  इन्होने सिरपुर को द्वितीय राजधानी बनाया था
 
8. प्रर्वरराज II ( महाप्रर्वरराज ) –  ये सुदेवराज के पुत्र थे, इनके शासन काल में इंद्रबल के चाचा सुरबल की सहायता से प्रर्वरराज II पराजित किया। इसके सम्बन्ध में जानकारी इंद्रबल के अलंगा अभिलेख बिलासपुर से प्राप्त होती है । प्रर्वरराज II का ठकुरदिया ताम्रपत्र अभिलेख ( सारंगढ़ ) तथा मल्हार से प्राप्त अभिलेख से इनके शासनकाल की जानकारी प्राप्त होती है।
 
नोट : 
  • इस वंश के सोने के सिक्के जारी करने वाले प्रथम शासक शरभराज थे
  • शरभपुरीय ताम्रपत्रों पर जारी करने की तिथि, उसका स्थान एवं वर्ष का उल्लेख मिलता है परन्तु इसमें चित्र की प्राप्ति नहीं होती 
  • इसकी राजमुद्रा – गजलक्ष्मी 
  • इस वंश के शासकों ने “तालागांव” बिलासपुर में काल पुरुष रूद्र शिव की प्रतिमा का निर्माण कराया है ( इसे 10 जानवरों की रूप प्रतिरूप से बनाया गया है )
प्रमुख अभिलेख 
  1. प्रयाग प्रस्तति अभिलेख – समुद्रगुप्त
  2. ऐरण अभिलेख – भानुगुप्त
  3. पिपरुपुला ताम्रपत्र – राजा नरेन्द्र ( सारंगढ़ )
  4. करुन्द अभिलेख – राजा नरेन्द्र ( धमतरी )
  5. मल्हार ताम्रपत्र अभिलेख – जयराज
  6. आरंग ताम्रपत्र अभिलेख – जयराज
  7. शरभपुर ताम्रपत्र अभिलेख 6 – सुदेवराज
  8. शरभपुर ताम्रपत्र अभिलेख 2 – सुदेवराज
  9. कौवाताल अभिलेख (सिरपुर ) – सुदेवराज ( सम्पूर्ण शरभपुरीय )
  10. अलंगा अभिलेख ( बिलासपुर ) – इंद्रबल
  11. ठकुरदिया ताम्रपत्र अभिलेख ( सारंगढ़ ) – प्रर्वरराज II

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