भारत में गरीबी और बेरोजगारी

गरीबी क्या है ? What is Poverty ?

जब कोई व्यक्ति अपनी आधारभूत आवश्यकता  रोटी, कपडा तथा माकन को पूरा न कर पाए वह गरीबी रेखा के अंतर्गत आता है । लेकिन ऐसी गरीबी निरपेक्ष गरीबी है, क्यूंकि ये देश काल परिस्थिति के अनुसार नहीं बदलती। निरपेक्ष गरीबी  का अर्थ हर जगह गरीबी ।
गरीबी का दूसरा आधार तुलनात्मक / सापेक्ष गरीबी है , यहाँ हम किसी की तुलना में आय या जीवन स्वर को मापते है, ऐसे में हमें गरीबी के साथ जो नजर आती है वो है आर्थिक विषमता , इसलिए अल्पविकसित या विकसित में निरपेक्ष गरीबी देखि जाति है ।
निरपेक्ष गरीबी का प्रयोग गरीबी की संख्यां पता करने में होता है, और सापेक्ष गरीबी का प्रयोग आर्थिक विषमता को पता करने में होता है ।

गरीबी का मापन कैसे किया जा सकता है ?

निरपेक्ष गरीबी को मापने का तरीका गरीबी रेखा को निर्धारित करके “Head Count Method” से उस रेखा के निचे आने वाले लोगो की गणना करनी चाहिए

भारत में गरीबी और बेरोजगारी

गरीबी रेखा तय करने की विधि

गरीबी रेखा तय करने की 2 विधि है – 1. कैलोरी अंतर्ग्रहण 2. न्यूनतम उपभोग व्यय
एक आदमी को एक दिन में कितने कैलोरी न्यूनतम चाहिए
स्वतंत्रता के बाद 2000 तक हम कैलोरी विधि में चलते रहे , इसके बाद मिनहास ने कहा ” गरीबी कम हो रही है ” और ओझा ने कहा ” ग्रामीण गरीबी बढ़ रही है 1950 -60 के दशक में मिनहास तथा ओझा ने गरीबी रेखा तय की थी
1960 में दांडेकर और रथ आये, 1961-67 के बीच अध्ययन किया , इन्होने गरीबी को स्थिर बताया, ये सभी कैलोरी पर तय किया गया गरीबी रेखा को बताने का सबसे व्यवस्थित प्रयास प्रो. लकडवाला ( प्रो. D. T. Lakadwala ) समिति ने किया
ये समिति 1989 में बनी और 1992 में रिपोर्ट पेश की, और Planning Commission ने लकडवाला समिति के फार्मूला को 1997 में 9th Five Year लागू की
1992 में गरीबी के बारे में निम्न निष्कर्ष दिए :- 
  1. भारत में सम्पूर्ण गरीबी 36% है ।
  2. ग्रामीण गरीबी के निर्धारण के लिए 2400 कैलोरी और शहरी गरीबी के निर्धारण के लिए 2100 कैलोरी की आवश्यकता है ।
  3. ग्रामीण गरीबी के लिए आय कृषि श्रमिको के उपभोक्ता मूल्य सुचकांक से ।
  4. शहरी गरीबी के लिए आय औद्योगिक श्रमिको के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से ।
  5. 25 राज्य एवं 7 संघशासित को मिलाकर कुल 32 गरीबी रेखा बनायीं जायेगी, यही फार्मूला  9वीं पंचवर्षीय योजना तक जारी किया ।
  6. 2002-2003 में प्लानिंग कमिशनों ने बताया की भारत में 26% लोग गरीबी रेखा के निचे है लेकिन इस आंकड़े के आने के बाद अर्थशास्त्रियों में विवाद पैदा हुआ और कहा कैलोरी विधि या लकडवाला विधि उपयोगी नहीं रहा ।
  7. अब गरीबी मापन की नई नई समिति बनाने लगी, 2005 में अर्जुन सेन गुप्ता समिति बनी इस समिति ने Food Security के आधार पर गरीबी तय किया और बताया भारत में 66% लोगो को खाद्य की आवश्यकता है ।
  8. 2008 में सुरेश तेंदुलकर समिति बनी जिसने दिसम्बर 2009 में रिपोर्ट दी और कहा गरीबी रेखा तय करने के लिए कैलोरी मेथड नहीं बल्कि न्यूनतम उपभोग व्यय की सिफारिश की ।
  9. इस उपभोग व्यय को निकालने के लिए न्यूनतम आवश्यकता की टोकरी ( इसमें कुछ वस्तु को रखा गया जो जीवन की आधारभूत आवश्यकता है ) बनाई । इसके आधार पर उन्होंने नए फोर्मुले से भारत के गरीबी के आंकड़े दिए ।
  10. इस नए फोर्मुले ने 2004-05 के आंकड़े को बताया और 2004-05 में 37.2% लोग थे । 2009-10 में 29.8% गरीब है, 2011-12 में 21.9% लोग गरीब है ।
  11. उन्होंने कई गाँवों में न्यूनतम उपभोग व्यय 27 रूपये प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन और शहर में 33 रूपये होगा कहा, इस बात पर विवाद हुआ, जिसमें तेंदुलकर समिति की जाँच के लिए “रंगराजन समिति” बनी ।

रंगराजन समिति 2011

इस समिति का गठन सुरेश तेंदुलकर समिति की समीक्षा के लिए किया गया था , रंगराजन समिति ने 2012 में रिपोर्ट दी और तेंदुलकर के आंकड़ो में 2 बदलाव किये ।
  1. अब न्यूनतम उपभोग व्यय ग्रामीण  27 और  शहरी 33 से बदलकर ग्रामीण में 33 और शर में 47 रूपये कर दिया ।
  2. रंगराजन समिति के अनुसार भारत में गरीबी 29.5 % थी। वर्तमान में भारत सरकार और निति आयोग द्वारा सुरेश तेंदुलकर फोर्मुले में गरीबी के आंकड़े स्वीकार किये जाते है, जिसके अनुसार
a. सर्वाधिक गरीबी के 3 राज्य
b. सबसे कम गरीबी वाला राज्य
न्यूनतम गरीबी वाले राज्य – महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा तथा जम्मू कश्मीर
गरीबी % में अग्रणी राज्य – सुरेश तेंदुलकर – 39.7% एवं रंगराजन समिति – 47.9%