भारतीय इतिहास का विभाजन

 
Ancient History for CGPSC Vyapam Exams Details Study Part 1:  आप पैसे खर्च करके जिस किसी भी संस्था या कोचिंग में जाकर CGPSC, Vyapam या किसी अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए पढाई करते हो, वो सभी जानकारी हम आपको बिलकुल मुफ्त में प्रदान करेंगे । तो आइये हम प्राचीन इतिहास को शुरू से पढेंगे और उसकी तयारी करेंगे , इसके साथ साथ हम इस पढाई का TEST भी लेंगे ।

Ancient History for CGPSC Vyapam Exams Details Study Part 1

इतिहास 

इतिहास शब्द इति+ह+आस से मिलकर बना है जिसका अर्थ है ” ऐसा हुआ निश्चित रूप से”। इतिहास का जन्म दाता यूनान के इतिहासकार “हेरोडोटस” को माना जाता है । इनकी रचना “हिस्टोरिका” है ।

भारतीय इतिहास का विभाजन

भारतीय इतिहास को ब्रिटिश अर्थशास्त्री ” जेम्समिल” ने साम्प्रदायिकता के आधार पर 3 भागों में विभाजित किया है।
  1. हिन्दू काल  ( Hindu Era )
  2. मुस्लिम काल ( Muslim Era )
  3. ब्रिटिश काल ( British Era )
राष्ट्रवादी इतिहासकार ” रमेशचन्द्र मजुमदार ” ने भी इसे 3 भागों में बांटा है :-
  1. प्राचीन काल (Ancient)
  2. मध्यकाल ( Medieval )
  3. आधुनिक काल ( Modern )
इतिहास का अन्य विभाजन भी किया गया है :
  1. प्रागैतिहासिक (Prehistoric)
  2. अधौतिहासिक (The historical)
  3. ऐतिहासिक ( Historical )

इतिहास के अंग

 इतहास के 4 अंग माने गए है

  1. काल  ( Era )
  2. स्थान ( Place )
  3. समय ( Time )
  4. व्यक्ति ( Person )
Ancient History for CGPSC Vyapam Exams Details Study Part 1
 
Ancient History for CGPSC Vyapam Exams Details Study Part 1

 

 
प्रागैतिहासिक काल  (Prehistoric Era) 
  • प्रागैतिहासिक काल इतिहास का वह काल है जिसके सम्बन्ध में कोई लिखित जानकारी नहीं है ।
  • इस काल में मनुष्य जंगली जीवन जीता था , शिकार करता था तथा पत्थरों की गुफाओं में निवास करता था ।
  • मनुष्य पत्थरों के  छोटे छोटे बने औजारों का उपयोग करता था ।
  • इस काल को 3 भागों में विभाजित किया गया है :-
  1. पूर्ण पाषाण काल
  2. मध्य पाषाण काल
  3. नव पाषाण काल
अधौतिहासिक काल  (The Historical Era) 
 
  • इतिहास का वह कालखंड है जिसके संदर्भ में लिखित सामग्री उपलब्ध है किन्तु उसे पढ़ा नहीं जा सकता ।
  • इस काल की लिपि वर्णात्मक ना होकर भावचित्रात्मक थी ।
  • इस लिपि को बांये से दांये और दांये से बांये लिखा जाता था ।
  • इस प्रकार की लिपि को बस्ट्रोफेदन ( Boustrophedon ) लिपि कहा जाता है ।
  • सिन्धु घाटी की सभ्यता को इसी काल के अंतर्गत रखा गया है ।
ऐतिहासिक काल  ( Historic Era) 
 
  • इतिहास का वह काल जिसके संदर्भ लिखित जानकारी भी है और इसे पढ़ा भी जा सकता है ।
  • वैदिक एवं महाकाव्य काल इसके अंतर्गत आते है ।
भारत का नामकरण – Naming of India
 
  • विदेशी सर्वप्रथम सिन्धु तट वासियों के अम्प्र्क में आये थे , इसलिए उन्होंने सारे देश को सिन्धु या Indus नाम से ही पुकारा ।
  • ईरान के शासकों के अभिलेखों में देश का नाम “हिंदुस्तान” मिलता है ।
  • “अशोक ” के अभिलेखों में हमारे देश का नाम “जम्बुद्वीप” मिलता है क्यूंकि यहाँ जम्बू वृक्ष के अधिकता थी।
  • यूनानियों ने देश को INDIA कहकर पुकारा था ।
  • भारतवर्ष अर्थात भरत का देश “ऋग्वेद ” में भरत नामक एक राजा का उल्लेख मिलता है और इसके आधार पर ही इसका नाम भारतवर्ष पड़ा।
  • महिर्षि पतंजली ने अपनी रचना ” महाभाष्य” में भारत को  “आर्यावत” अर्थात आर्यों का देश कहा ।
  • चीनियों ने भारत को “यिन तु (Yin-Tu ) ” कहा है ।
इसके आगे की जानकारी अगले भाग में देखें । .
 
 

Leave a Comment