भारतीय संविधान एवं निर्माण

भारतीय संविधान एवं  निर्माण–  संविधान को जानने के लिए सबसे पहले हमें भारतीय राजव्यवस्था को समझना होगा जिसमें  “राज्य एवं  राजव्यवस्था” आते  है, और इनके तत्व क्या क्या है। CGPSC एवं Vyapam की तैयारी के लिए यह ब्लॉग पढ़े.।

भारतीय राजव्यवस्था

राज्य राज्य वह राजीनीतिक संगठन है जो किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में निवासरत जनसंख्याँ पर केन्द्रीय सरकार के माध्यम से शासन करती है, तथा हिंसा ( बल, दंड ) का वैधानिक एवं एकाधिकारवादी का प्रयोग करती है ।
 
राज्य के 4 अनिवार्य तत्व होते है 
1. भौगोलिक क्षेत्र 
2. जनता
3. केन्द्रीय सरकार 
4. संप्रभुता 
 
राजव्यवस्था : राज्य में प्रशासन के लिए जिस व्यवस्था का निर्माण किया जाता है वह राजव्यवस्था कहलाती है । इसके अनेक प्रकार हो सकते है जैसे — राजतंत्र, गणतंत्र आदि ।
राजतंत्र पुनः स्वेच्छाचारी या लोकतान्त्रिक हो सकता है किन्तु इसमें राज्य का मुखिया सदैव वंशानुगत रूप से  बनेगा । उदाहरण के तौर पर ब्रिटेन एक लोकतान्त्रिक राजशाही है जबकि गणतंत्र में राज्य का मुखिया अनिवार्य रूप से निर्वाचित व्यक्ति होगा 
 
गणतंत्र और लोकतंत्र में मौलिक अंतर पाया जाता है, लोकतंत्र जहाँ भीड़ का शासन है, तथा बहुसंख्यक हितों के संरक्षण पर अधिक बल देता है, वहीँ दूसरी ओर गणतंत्र विधि के शासन पर आधारित होता है तथा जहाँ अल्पसंख्यक के हितो का ध्यान रखा जाता है, साथ ही सरकार के अधिकार निश्चित होते है 
 

भारतीय संविधान एवं  निर्माण

Indian Constitution and Construction

 

संविधान

संविधान किसी राज्य की सर्वोच्च विधि होती है, जिसके माध्यम से उस राज्य की राजव्यवस्था का संचालन होता है, तथा राज्य के विभिन्न अंग जैसे विधायिका , कार्यपालिका एवं न्यायपालिका अपनी शक्तियां प्राप्त करती है 
 
निर्माण के आधार पर संविधान लिखित या अलिखित हो सकता है । ब्रिटेन का संविधान अलिखित अर्थात परम्पराओं से बना हुआ संविधान है, जबकि अमेरिका का अन्विधन व्यवस्थित रूप से बनाया हुआ अर्थात प्रथम लिखित संविधान है 
 

भारत का संविधान विश्व का सबसे वृहद् लिखित संविधान है

 
भारतीय संविधान : भारतीय संविधान में 22 भाग एवं 12 अनुसूचियां तथा 395 अनुच्छेद है । भारतीय संविधान का निर्माण भारतीय जनता के प्रतिनिधि के रूप में संविधान सभा के द्वारा किया गया है 
 
संविधान में संशोधन का अधिकार संसद को प्रदान किया गया है जबकि अंतिम व्यवस्था का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय के पास है । राष्ट्रपति अपनी शपथ के अनुसार संविधान का “अभिभावक” होता है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक माना जाता है 
 

संविधान का निर्माण ( Constitution Making )

भारत में अंग्रेजों को राजनैतिक शक्ति बनने के साथ ही संवैधानिक विकास की प्रक्रिया शुरू हुई। 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट से शुरू होकर 1947 के भारतीय स्वंत्रता अधिनियम तक भारतीय संविधान को प्रभावित करने वाले अनेक अधिनियम आये जिनका संविधान निर्माण में गहरा प्रभाव दिखा 
 
सर्वप्रथम “बाल गंगाधर तिलक” के द्वारा भारतियों के लिए संविधान सभा की मांग की गई थी, वर्ष 1922 में महात्मा गांधी ने कहा था की भारत का संविधान भारतियों द्वारा निर्मित होगा, किन्तु संविधान सभा का व्यवस्थित रूप प्रस्तुत करने का श्रेय भारत में कम्युनिस्ट आन्दोलन के प्रवर्तक मानवेन्द्र नाथ राय को जाता है 
 
वर्ष 1936 में कांग्रेस ने संविधान सभा के गठन की मांग की तथा वर्ष 1938 में जवाहर लाल नेहरु के द्वारा कहा गया की संविधान सभा व्यस्क मताधिकार पर आधारित होगी। 
 
अगस्त 1940 के लिनलिथिगो के द्वारा संविधान सभा की मांग को सैधांतिक रूप मिला जबकि 1942 में आये क्रिप्स मिशन ने यह स्वीकार किया की भारत के संविधान का निर्माण भारतियों की संविधान सभा के द्वारा किया जायेगा। 1946 के कैबिनेट मिशन योजना के तहत भारत में संविधान सभा का गठन किया गया 
 
संविधान सभा के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य पैन्थिक लोरेंस , क्रिप्स A.V. अलेक्सेंडर थे । कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा के लिए समूचे भारत को 389 सीटों में बांटा गया, इनमें से 292 सीटें ब्रिटिश प्रान्तों को 4 उच्चायुक्त क्षेत्र को तथा 93 सीटें देशी रियासतों को दी गई 
 
संविधान सभा में कांग्रेस के अतिरिक्त अनेक दलों के सदस्य शामिल थे तथा यह सभा संविधान निर्माण के अतिरिक्त केंद्र की विधायिका के रूप में भी कार्य करती थी । संविधान सभा ने अपना कार्य अनेक समितियों द्वारा किया जो निम्न थी :-
 
1. प्रारूप समिति ( 29 अगस्त 1947 ) बी.आर. आंबेडकर (अध्यक्ष)
अन्य सदस्य : गोपाल स्वामी अयंगर, के.एम्. मुंशी , मोहम्मद साद्दुला ,अन्नादि कृष्ण स्वामी अय्यर , माधव राव , और टी.डी. कृष्णामाचारी
 
2. संघ शक्ति समिति  ( जवाहरलाल नेहरु )
3. संघ संविधान समिति ( जवाहरलाल नेहरु )
4. रियासती मामले ( जवाहरलाल नेहरु )
5. प्रान्त संविधान समिति ( वल्लभ भाई पटेल )
6. मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक ( वल्लभ भाई पटेल )
7. नियम व प्रक्रिया ( डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद )
8. सञ्चालन समिति ( डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद )
 
प्रारूप समिति के अध्यक्ष बी.आर. आंबेडकर का निर्वाचन पूर्वी बंगाल में हुआ था परन्तु विभाजन के बाद उन्होंने संविधान सभा की सदस्यता बम्बई प्रान्त की पूना की सिट से पग्रहण की 
 
सभा के संवैधानिक सलाहकार बी.एन.राव बनाये गए जिन्होंने संविधान के पहले प्रारूप का निर्माण किया, संविधान सभा ने कुल 11 बैठकें की तथा 2 वर्ष 11 माह 18 दिनों में 64 लाख रूपये की लागत से 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हो गया 
 
सभा की 12वीं तथा अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को सम्पन्न हुई । 26 जनवरी 1950 से संविधान के पुर्णतः लागू होते ही भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य बन गया 
 
राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया, राष्ट्र गान तथा राष्ट्रगीत को 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया , तथा इसी दिन डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति बने 
 

भारत का राष्ट्रीय प्रतीक जो अशोक के सारनाथ स्तम्भ से लिया गया है उसे 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया 

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