Gandhi Ji in Chhattisgarh – गांधीजी का छत्तीसगढ़ में द्वितीय आगमन 1933

Gandhi Ji in Chhattisgarh – द्वितीय सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय गांधीजी ने हरिजन कल्याण हेतु समस्त भारत की यात्रा की, इसी क्रम में गांधीजी का द्वितीय आगमन छत्तीसगढ़ में भी हुआ । यहाँ गांधीजी 1933 में 22 -28 नवम्बर तक रुके थे ।
  • दुर्ग – 22 नवम्बर
  • रायपुर – 23 नवम्बर
  • धमतरी – 24 नवम्बर
  • बिलासपुर – 25 नवम्बर
  • भाटापारा – 26 नवम्बर
  • रायपुर – 27 नवम्बर
  • गोंदिया – 28 नवम्बर
Gandhi Ji in Chhattisgarh – छत्तीसगढ़ में गांधीजी ने हरिजन उत्थान कार्यक्रम प्रारम्भ किया तथा सर्वप्रथम उन्होंने अपनी पत्रिका “नवजीवन” का नाम बदलकर “हरिजन सेवक” रखा । गांधीजी के इस कार्यक्रम से प्रभावित होकर रामदयाल तिवारी ने गांधी मीमांशा नामक पुस्तक की रचना की जिसमें गांधीजी के यात्रा एवं कार्यक्रमों का विवरण था ।
गांधीजी के साथ छत्तीसगढ़ में आने वाले प्रमुख नेताओं में :
मीरा बेन (ब्रिटिश शिष्या), महादेव देसाई (गांधीजी के सचिव) ठक्कर बापा (आदिवासी नेता) तथा जमुना बजाज की पुत्री (नागपुर की राष्ट्रीय नेता) आदि थे ।
गांधीजी के द्वारा 8 अगस्त 1942 में कांग्रेस का अधिवेशन मुंबई के वर्धा में आयोजित किया गया तथा इस अधिवेशन अंग्रेजों को भारत छोड़ने हेतु आन्दोलन प्रारम्भ करने का प्रस्ताव रखा गया , जिसे कांग्रेस ने सर्व सम्मति से पारित किया ।
इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ के पं. रविशंकर शुक्ल, द्वारिका प्रसाद मिश्र, घनश्याम सिंहगुप्त, ठाकुर छेदीलाल, महंत लक्ष्मीनारायण दास तथा यति यतन लाल ने भाग लिया ।
9 अगस्त 1942 को आन्दोलन प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया परन्तु अंग्रेजों के द्वारा ऑपरेशन जीरो घंटा (Operation Zero Hour) चलाकर सभी राजनेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, इसे “अगस्त क्रान्ति” का नाम दिया गया 
 
 

Gandhi Ji in Chhattisgarh – गांधीजी का छत्तीसगढ़ में  द्वितीय आगमन 

 
Gandhi Ji in Chhattisgarh - गांधीजी का छत्तीसगढ़ में  द्वितीय आगमन 1933

 

मल्कानपुर की घटना

 
Gandhi Ji in Chhattisgarh – वर्धा अधिवेशन से छत्तीसगढ़ वापसी के दौरान छत्तीसगढ़ के राजनेताओं पं. रविशंकर शुक्ल, घनश्याम सिंहगुप्त, कुंज बिहारी अग्निहोत्री तथा इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के सभी राजनेताओं को नागपुर के मल्कानपुर स्टेशन से अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया 
 
प्रमुख राजनेताओं की गिरफ्तारी होने पर आन्दोलन नेतृत्व विहीन हो गया, तब छत्तीसगढ़ के किसान, श्रमिक तथा युवा छात्रों में स्वतः स्फुट की भावना जागृत हुई और तीनों वर्गों ने अपने अपने स्तर पर आन्दोलन का संचालन किया 
 
  • रायपुर में – नेतानाथ तिवारी, जयनारायण पांडे, रणवीर सिंह शाहजी, भगवती चरण शुक्ल तथा कमल नारायण शर्मा 
  • दुर्ग में – रघुनंदन सिंगरौल, नरसिंह प्रसाद अग्रवाल, गणेश प्रसाद तथा रत्नाकर प्रमुख थे 
  • बिलासपुर में – राजकिशोर वर्मा, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव
  • राजनांदगांव में – ठाकुर रामकृष्ण आदि 
 
इन सभी नेताओं द्वारा छत्तीसगढ़ में भारत छोड़ो आन्दोलन का क्षेत्रीय स्तर में नेतृत्व किया गया ।
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