धन विधेयक एवं वित्त विधेयक

अनुच्छेद 110 – निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा

धन विधेयक

धन विधेयक वह विधेयक है जिसमें निम्न निहित है –
कर
उधार
विनियोग
संचित निधि पर किसी व्यय को भारित करना
अंकेक्षण ( Audit )
प्राप्तियां ( फ़ीस,जुर्माना, स्थानीय कर शामिल नहीं है )
  • धन विधेयक लोकसभा द्वारा प्रस्तावित किया जाता है ।
  • इसके लिए पूर्वानुमति आवश्यक होती है ।
  • धन विधेयक में लोकसभा की शक्ति निहित होती है ।
  • संयुक्त अधिकार नहीं होता अपितु लोकसभा की ही शक्ति होती है  ।

अनुच्छेद 117 (1) एवं (3) वित्त विधेयक

वित्त विधेयक 117 (1)

  • वह विधेयक है जिसमें धन विधेयक में अन्य प्रावधान जोड़े जाते है, जैसे कर सम्बन्धित तथा अन्य मामले ।
  • वित्त विधेयक 1 में लोक सभा एवं राज्य सभा की शक्ति होती है ।
  • इसमें पूर्वानुमति आवश्यक है ।
  • यह लोकसभा द्वारा ही प्रस्तावित होता है ।
  • चूँकि इसमें लोकसभा एवं राज्य सभा की शक्ति होती है इसलिए इसमें संयुक्त अधिकार होता है ।
  • इसमें राष्ट्रपति से संशोधन पूर्व अनुमति आवश्यक है लेकिन ऐसा संशोधन जो Tax कर को कम करने या खत्म करने के आलावा हो)।

धन विधेयक एवं वित्त विधेयक

 
धन विधेयक, वित्त विधेयक

 

वित्त विधेयक 117 (3)

  • वह विधेयक है जिसमें व्यय में संचित निधि  110 के आलावा घटाया जाता है ।
  • वित्त विधेयक 1 में लोक सभा एवं राज्य सभा की शक्ति होती है ।
  • इसमें पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं है ।
  • यह लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों के द्वारा प्रस्तावित होता है ।
  • चूँकि इसमें लोकसभा एवं राज्य सभा की शक्ति होती है इसलिए इसमें संयुक्त अधिकार होता है ।
  • इसमें राष्ट्रपति से संशोधन पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं  है।

विशेषाधिकार प्रस्ताव

संसदीय नियमों एवं प्रक्रिया के तहत किसी मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार प्रस्ताव उठाया जा सकता है,  यदि वह किसी मामले के तथ्यों को रोकता है, अथवा तथ्यों का बिगड़ा हुआ वर्णन देता है ।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 105 संसद के सदनों की तथा उनके सदस्यों की शक्तियों, विशेषाधिकार तथा उन्मुक्तियों को निर्धारित करता है ।

सरकारी प्रस्ताव

केवल मंत्री ला सकते है ।
पास होने की सम्भावना ज्यादा होती है ।
पारित नहीं होने पर सरकार को अल्पमत माना जायेगा और सरकार को विश्वास मत लाना पड़ेगा ।
7 दिन पहले सुचना आवश्यक।

गैर सरकारी प्रस्ताव

मंत्री के आलावा पास होने की सम्भावना कम होती है ।
पारित नहीं होने पर प्रभावी भी नहीं ।
30 दिन पहले नोटिस देना होगा ।

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